
🌿 पेसा कानून क्या है? (आसान शब्दों में)
पेसा कानून का मतलब है —
👉 आदिवासी इलाकों में फैसले सरकार नहीं, गाँव वाले खुद करेंगे।
यह कानून अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) यानी आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए है — जैसे झारखंड के कई जिले।
🏡 ग्राम सभा सबसे ताकतवर
पेसा कानून में ग्राम सभा (गाँव की आम बैठक) को सबसे ऊपर रखा गया है।
अब:
मुखिया या अफसर से पहले
ग्राम सभा की सहमति जरूरी होगी
🔑 ग्राम सभा को मिलने वाले मुख्य अधिकार
1️⃣ जमीन से जुड़े फैसले
किसी की आदिवासी जमीन गैर-आदिवासी को नहीं दी जा सकती
जमीन अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की अनुमति जरूरी
जबरन जमीन लेने पर ग्राम सभा विरोध कर सकती है
2️⃣ खनन और विकास कार्य
पत्थर, बालू, खनन, फैक्ट्री, सड़क, बांध
➡️ सब पर ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी
बिना अनुमति काम हुआ तो ग्राम सभा रोक सकती है
3️⃣ जंगल और प्राकृतिक संसाधन
जंगल, जल, पहाड़, नदी पर
👉 पहला अधिकार गाँव का
महुआ, तेंदू पत्ता, लकड़ी जैसे वन उपज पर
👉 ग्राम सभा का नियंत्रण
4️⃣ शराब पर नियंत्रण
गाँव तय करेगा:
शराब बिकेगी या नहीं
दुकान खुलेगी या बंद होगी
शराब से जुड़ा झगड़ा ग्राम सभा सुलझा सकती है
5️⃣ परंपरागत व्यवस्था को मान्यता
मांझी-परगना, पाहन, मुंडा जैसी आदिवासी व्यवस्था को मान्यता
गांव के पुराने नियम अब कानूनी रूप से माने जाएंगे
6️⃣ पुलिस और प्रशासन पर नियंत्रण
छोटे विवाद पहले ग्राम सभा में सुलझेंगे
थाना-कचहरी अंतिम रास्ता होगा
📌 झारखंड में इसका क्या फायदा होगा?
✔️ जबरन जमीन अधिग्रहण रुकेगा
✔️ बाहरी कंपनियों की मनमानी बंद होगी
✔️ ग्राम सभा मजबूत होगी
✔️ आदिवासी संस्कृति और हक सुरक्षित रहेंगे
एक लाइन में समझिए
“पेसा कानून मतलब – आदिवासी इलाकों में अब हुकूमत गाँव की चलेगी, अफसरशाही की नहीं।




